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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बारे में

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बारे में
सेंसेक्स और निफ्टी दो प्रमुख लॉर्ज कैप इंडेक्सेज हैं जो देश के दो प्रमुख स्टॉक्स एक्सचेंजेज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंजेज से जुड़ा हुए हैं.

आईपीओ: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मेगा आईपीओ में हो सकती है देरी, ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन 10 प्रतिशत घटा

पिछले तीन सालों से अटका है एनएसई का आईपीओ - Dainik Bhaskar

निवेशकों से मिली जानकारी के मुताबिक अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई के शेयरों की कीमत 950 रुपए के भाव पर कारोबार कर रहे हैं। इस तरह से इसका वैल्यूएशन 50,000 करोड़ रुपए लगाया गया है। इसके पहले अप्रैल में यह शेयर 1,050 रुपए पर कारोबार कर रहा था। कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने हाल के महीनों में एनएसई के शेयर को 1,200 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से खरीदा है। इस भाव पर इसका वैल्यूएशन 60,000 करोड़ रुपए आंका गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक ढेर सारे ब्लू चिप स्टॉक्स के वैल्यूएशन में इसलिए गिरावट आई है क्योंकि बाजार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बारे में आईपीओ की समय सीमा को लेकर बड़े पैमाने पर अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही मार्केट का सेंटीमेंट भी इस समय ठीक नहीं है। इस तरह की ज्यादा मांग संस्थागत और अल्ट्रा एचएनआई ग्राहकों से आती है, पर यह मांग अभी सुस्त है। एनएसई के वैल्यूएशन में कमी की दूसरी वजह सेकेंडरी मार्केट में लगातार गिरावट भी है। बेंचमार्क सेंसेक्स इस साल में अब तक 24 प्रतिशत गिरा है। यह इसलिए क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित रास्ता अपनाया है और साथ ही कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां ठप हैं।

वैसे एनएसई में एक निवेशक होने की प्रक्रिया भी बहुत जटिल है। अगर आप इसके शेयर खरीदते या बेचते हैं तो आपको एनएसई के शेयरहोल्डर कमिटी में एक औपचारिक प्रपोजल भेजना होगा। यहां से आपकी डील को मंजूरी मिलेगी। हकीकत में एफआईआई और घरेलू निवेशकों का हिस्सा अलग-अलग किया जाता है, जहां पर दोनों एक दूसरे का शेयर नहीं खरीद सकते हैं। एनएसई के आईपीओ के बारे में अनुमान है कि यह वित्तीय वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में आ सकता है। हालांकि पिछले तीन सालों से इसका आईपीओ अटका पड़ा है। इसका कारण यह है कि सेबी लगातार एनएसई और इसके टॉप अधिकारियों की जांच कर रहा था।

सेबी ने आरोप लगाया कि एनएसई के कुछ अधिकारी कुछ कारोबारियों और ब्रोकरों को को-लोकेशन की सुविधा दे रहे थे। यह सुविधा एक विशेष फीस पर दी जा रही थी। अप्रैल में सेबी ने एनएसई और इसके अधिकारियों के खिलाफ एक ऑर्डर पास किया जिसमें 31 अ्क्टूबर तक ये दोनों पूंजी बाजार में भाग नहीं ले सकते हैं। खबर है कि इनवेस्टमेंट बैंकर्स जल्द ही नियुक्त किए जा सकते हैं। दिसंबर में एनएसई ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय से संपर्क किया था। हाल में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एनएसई के 50 लाख शेयर 1,000 रुपए के मूल्य पर कनाडा के अरबपति प्रेम वात्सा को बेचा था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बारे में

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Sensex और Nifty के बारे में क्यों होती है इतनी बात, क्या है इनके कैलकुलेशन का तरीका, जानिए कई दिलचस्प सवालों के जवाब

How Sensex and Nifty Calculated: सेंसेक्स और निफ्टी स्टॉक मार्केट में उठा-पटक को मापने का काम करते हैं.

Sensex और Nifty के बारे में क्यों होती है इतनी बात, क्या है इनके कैलकुलेशन का तरीका, जानिए कई दिलचस्प सवालों के जवाब

सेंसेक्स और निफ्टी दो प्रमुख लॉर्ज कैप इंडेक्सेज हैं जो देश के दो प्रमुख स्टॉक्स एक्सचेंजेज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंजेज से जुड़ा हुए हैं.

Know How Sensex and Nifty are Calculated: कारोबार की खबरें पढ़ने के दौरान कुछ शब्द बार-बार सामने आते हैं जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी प्रमुख हैं. खबरों के जरिए पता चलता है कि सेंसेक्स ने रिकॉर्ड स्तर छुआ या सेंसेक्स में गिरावट के चलते निवेशकों का करोड़ों का नुकसान हुआ, ऐसे में आम लोगों के मन में दिलचस्पी उठना स्वाभाविक हैं कि सेंसेक्स और निफ्टी क्या हैं जिससे लोगों के करोड़ो का नफा-नुकसान जुड़ा हुआ है. इसके अलावा अगर शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करने की सोच रहे हैं तो भी इनके बारे में जानना बहुत जरूरी है.

Sensex और Nifty दो प्रमुख लॉर्ज कैप इंडेक्स यानी सूचकांक हैं. सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से जुड़ा इंडेक्रस है, जबकि निफ्टी नेशनल स्टॉक एक्सचेंच (NSE) से जुड़ा हुआ है. ये दोनों इंडेक्स स्टॉक मार्केट में उठा-पटक को मापने का काम करते हैं. आमतौर पर जब कोई निफ्टी कहता है तो उसका मतलब निफ्टी 50 होता है.

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Sensex क्या है?

सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स है. इसीलिए इसे बीएसई सेंसेक्स भी कहा जाता है. सेंसेक्स शब्द सेंसेटिव और इंडेक्स को मिलाकर बना है. हिंदी में कुछ लोग इसे संवेदी सूचकांक भी कहते हैं. इसे सबसे पहले 1986 में अपनाया गया था और यह 13 विभिन्न क्षेत्रों की 30 कंपनियों के शेयरों में होने वाले उतार-चढ़ाव को दिखाता है. इन शेयरों में बदलाव से सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव आता है. सेंसेक्स का कैलकुलेशन फ्री फ्लोट मेथड से किया जाता है.

कैसे होता है सेंसेक्स का कैलकुलेशन ?

  • सेंसेक्स में शामिल सभी 30 कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन निकाला जाता है. इसके लिए कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयरों की संख्या को शेयर के भाव से गुणा करते हैं. इस तरह जो आंकड़ा मिलता है, उसे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन या हिंदी में बाजार पूंजीकरण भी कहते हैं.
  • अब उस कंपनी के फ्री फ्लोट फैक्टर की गणना की जाती है. यह कंपनी द्वारा जारी किए कुल शेयरों का वह परसेंटेज यानी हिस्सा है जो बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होता है. जैसे कि किसी कंपनी ABC के 100 शेयरों में 40 शेयर सरकार और प्रमोटर के पास हैं, तो बाकी 60 फीसदी ही ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे. यानी इस कंपनी का फ्री फ्लोट फैक्टर 60 फीसदी हुआ.
  • बारी-बारी से सभी कंपनियों के फ्री फ्लोट फैक्टर को उस कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन से गुणा करके कंपनी के फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन की गणना की जाती है.
  • सेंसेक्स में शामिल सभी 30 कंपनियों के फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन को जोड़कर उसे बेस वैल्यू से डिवाइड करते हैं और फिर इसे बेस इंडेक्स वैल्यू से गुणा करते हैं. सेंसेक्स के लिए बेस वैल्यू 2501.24 करोड़ रुपये तय किया गया है. इसके अलावा बेस इंडेक्स वैल्यू 100 है. इस गणना से सेंसेक्स का आकलन किया जाता है.

निफ्टी 50 क्या है ?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी एक प्रमुख मार्केट इंडिकेटर है. निफ्टी शब्द नेशनल और फिफ्टी को मिलाने से बना है. नाम के अनुरूप इस इंडेक्स में 14 सेक्टर्स की 50 भारतीय कंपनियां शामिल हैं. इस प्रकार यह बीएसई की तुलना में अधिक डाइवर्सिफाइड है. बीएसई की तरह ही यह लार्ज कैप कंपनियों के मार्केट परफॉरमेंस को ट्रैक करता है. इसे 1996 में लांच किया गया था और इसकी गणना फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर की जाती है.

4. कैसे होता है Nifty का कैलकुलेशन?

  • निफ्टी की गणना लगभग सेंसेक्स की तरह ही फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटालाइजेशन के आधार पर होती है लेकिन कुछ अंतर भी है.
  • निफ्टी की गणना के लिए सबसे पहले सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन निकाला जाता है, जिसके लिए आउटस्टैंडिंग शेयर की संख्या को वर्तमान भाव से गुणा करते हैं.
  • इसके बाद मार्केट कैप को इंवेस्टेबल वेट फैक्टर (RWF) से गुणा किया जाता है. RWF पब्लिक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयरों का हिस्सा है.
  • इसके बाद मार्केट कैप को इंडिविजुअल स्टॉक को एसाइन किए हुए वेटेज से गुणा किया जाता है.
  • निफ्टी को कैलकुलेट करने के लिए सभी कंपनियों के वर्तमान मार्केट वैल्यू को बेस मार्केट कैपिटल से डिवाइड कर बेस वैल्यू से गुणा किया जाता है. बेस मार्केट कैपिटल 2.06 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और बेस वैल्यू इंडेक्स 1 हजार है.

5. इतने खास क्यों हैं Nifty और Sensex ?

भारतीय शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाले सिर्फ यही दो इंडेक्स नहीं हैं. इसके अलावा भी तमाम इंडेक्स मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल शेयरों की चाल को समझने के लिए किया जाता है. इनमें ज्यादातर इंडेक्स किसी खास सेक्टर या कंपनियों के किसी खास वर्गीकरण से जुड़े हुए हैं. मिसाल के तौर पर किसी दिन के कारोबार के दौरान 12 प्रमुख बैंकों के शेयरों की औसत चाल का संकेत देने वाला Bank Index या सिर्फ सरकारी बैंकों के शेयरों का हाल बताने वाला PSU Bank Index, स्टील, एल्यूमीनियम और माइनिंग सेक्टर की कंपनियों के शेयरों के चाल का संकेत देने वाला मेटल इंडेक्स या फार्मा कंपनियों के शेयरों का फार्मा इंडेक्स, वगैरह-वगैरह.

ये सभी इंडेक्स बाजार में पैसे लगाने वाले निवेशकों या उन्हें मशविरा देने वाले ब्रोकर्स या सलाहकारों के लिए बेहद काम के होते हैं. लेकिन अगर एक नजर में बाजार का ओवरऑल रुझान समझना हो या उसके भविष्य की दशा-दिशा का अंदाज़ा लगाना हो, तो उसके लिए सबसे ज्यादा सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बेंचमार्क इंडेक्स पर ही गौर किया जाता है. इन्हें मोटे तौर पर मार्केट सेंटीमेंट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बारे में का सबसे आसान इंडिकेटर माना जाता है.

अगर ये इंडेक्स न हों तो कारोबारी दिन के किसी भी वक्त में एक नज़र डालकर शेयर बाजार के रुझान का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाए. इसी तरह इन दोनों इंडेक्स के पिछले ऐतिहासिक आंकड़ों को देखकर बड़ी आसानी से यह निष्कर्ष भी निकाल लिया जाता है कि पिछले एक महीने, साल भर, 5 साल या उससे भी ज्यादा वक्त के दौरान भारतीय शेयर बाजार की चाल यानी लिस्टेड कंपनियों के कारोबार की दशा-दिशा कैसे रही है.

आईपीओ: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मेगा आईपीओ में हो सकती है देरी, ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन 10 प्रतिशत घटा

पिछले तीन सालों से अटका है एनएसई का आईपीओ - Dainik Bhaskar

निवेशकों से मिली जानकारी के मुताबिक अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई के शेयरों की कीमत 950 रुपए के भाव पर कारोबार कर रहे हैं। इस तरह से इसका वैल्यूएशन 50,000 करोड़ रुपए लगाया गया है। इसके पहले अप्रैल में यह शेयर 1,050 रुपए पर कारोबार कर रहा था। कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने हाल के महीनों में एनएसई के शेयर को 1,200 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से खरीदा है। इस भाव पर इसका वैल्यूएशन 60,000 करोड़ रुपए आंका गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक ढेर सारे ब्लू चिप स्टॉक्स के वैल्यूएशन में इसलिए गिरावट आई है क्योंकि बाजार में आईपीओ की समय सीमा को लेकर बड़े पैमाने पर अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही मार्केट का सेंटीमेंट भी इस समय ठीक नहीं है। इस तरह की ज्यादा मांग संस्थागत और अल्ट्रा एचएनआई ग्राहकों से आती है, पर यह मांग अभी सुस्त है। एनएसई के वैल्यूएशन में कमी की दूसरी वजह सेकेंडरी मार्केट में लगातार गिरावट भी है। बेंचमार्क सेंसेक्स इस साल में अब तक 24 प्रतिशत गिरा है। यह इसलिए क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित रास्ता अपनाया है और साथ ही कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां ठप हैं।

वैसे एनएसई में एक निवेशक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बारे में होने की प्रक्रिया भी बहुत जटिल है। अगर आप इसके शेयर खरीदते या बेचते हैं तो आपको एनएसई के शेयरहोल्डर कमिटी में एक औपचारिक प्रपोजल भेजना होगा। यहां से आपकी डील को मंजूरी मिलेगी। हकीकत में एफआईआई और घरेलू निवेशकों का हिस्सा अलग-अलग किया जाता है, जहां पर दोनों एक दूसरे का शेयर नहीं खरीद सकते हैं। एनएसई के आईपीओ के बारे में अनुमान है कि यह वित्तीय वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में आ सकता है। हालांकि पिछले तीन सालों से इसका आईपीओ अटका पड़ा है। इसका कारण यह है कि सेबी लगातार एनएसई और इसके टॉप अधिकारियों की जांच कर रहा था।

सेबी ने आरोप लगाया कि एनएसई के कुछ अधिकारी कुछ कारोबारियों और ब्रोकरों को को-लोकेशन की सुविधा दे रहे थे। यह सुविधा एक विशेष फीस पर दी जा रही थी। अप्रैल में सेबी ने एनएसई और इसके अधिकारियों के खिलाफ एक ऑर्डर पास किया जिसमें 31 अ्क्टूबर तक ये दोनों पूंजी बाजार में भाग नहीं ले सकते हैं। खबर है कि इनवेस्टमेंट बैंकर्स जल्द ही नियुक्त किए जा सकते हैं। दिसंबर में एनएसई ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय से संपर्क किया था। हाल में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एनएसई के 50 लाख शेयर 1,000 रुपए के मूल्य पर कनाडा के अरबपति प्रेम वात्सा को बेचा था।

भारत में कुल कितने स्टॉक एक्सचेंज है ?

Zerodha

भारतीय प्रतिभूति बोर्ड (SEBI) की वेबसाइट पर दी गई लिस्ट के अनुसार भारत में 7 स्टॉक एक्सचेंज है, और 5 कमोडिटी डेरीवेटिव एक्सचेंज (Commodity Derivative Exchanges) है, इस तरह ये कहा जा सकता है वर्ष २०१८ में कमोडिटी एक्सचेंज को मिलकर भारत में कुल एक्टिव 12 स्टॉक एक्सचेंज है

भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज

  1. BSE Ltd.- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज मुंबई– जिसका प्रमुख सूचकांक है – sensex – नेशनल स्टॉक एक्सचेंज , मुंबई – जिसका प्रमुख सूचकांक है – NIFTY(50)

इसके आलावा भारत के अन्य स्टॉक एक्सचेंज है –

भारत के अन्य स्टॉक एक्सचेंज

  1. Calcutta Stock Exchange Ltd.- cse-india जिसका मुख्यालय कलकत्ता बंगाल में है, https://www.cse-india.com/
  2. India International Exchange (India INX) –मुम्बई, यहाँ BSE का सहायक एक्सचेंज है.
  3. Magadh Stock Exchange Ltd. – पटना,
  4. Metropolitan Stock Exchange of India Ltd.- बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स –मुंबई, प्रमुख इंडेक्स SX40
  5. NSE IFSC Ltd.- मुंबई – NSE का सहायक एक्सचेंज.

STOCK EXCHANGE IN INDIA – SEBI SHAREMARKET HINDI

भारत के कमोडिटी डेरिवेटिव एक्सचेंज

सेबी (SEBI) की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत में कुल 5 कमोडिटी डेरिवेटिव एक्सचेंज है, इन सभी को परमानेंट लाइसेंस प्राप्त है,

कमोडिटी डेरिवेटिव में काम करने वाले प्रमुख एक्सचेंज है –

  1. Multi Commodity Exchange of India Ltd.इसे शोर्ट MCX के नाम से जाना जाता है, यह एक्सचेंज मुंबई में स्थित है. अधिक जानकारी आप इसकी वेबसाइटhttps://www.mcxindia.com/ पर प्राप्त कर सकते है.
  2. National Commodity & Derivatives Exchange Ltd.इसे शोर्ट में NCEDEX के नाम से जाना जाता है, जो मुंबई में स्थित एक्सचेंज है. अधिक जानकारी आप इसकी वेबसाइटhttp://www.ncdex.com/ पर प्राप्त कर सकते है.

इसके आलावा अन्य कमोडिटी डेरिवेटिव है –

  1. Ace Derivatives and Commodity Exchange Limited– इसका मुख्यालय अहमदाबाद में है, और ये एक क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंज है. अधिक जानकारी आप इसकी वेबसाइट http://www.aceindia.com/ पर प्राप्त कर सकते है.
  2. Indian Commodity Exchange Limited– इसे शोर्ट में ICEX के नाम से जाना जाता है, यह मुंबई स्थित है, अधिक जानकारी आप इसकी वेबसाइटhttp://www.icexindia.com/ पर प्राप्त कर सकते है.
  3. National Multi Commodity Exchange of India Limited.– इसे शोर्ट में NMCE के नाम से जाना जाता है, अधिक जानकारी आप इसकी वेबसाइटhttp://www.nmce.com/ पर प्राप्त कर सकते है.

COMMODITY DERRIVATIVE EXCHANGE IN INDIA – SEBI SHAREMARKET HINDI

तो दोस्तों, ये सही है कि जब आप इन्टरनेट पर सर्च करते है की भारत में कुल कितने स्टॉक एक्सचेंज है, तो आपको बहुत सारे अलग अलग जवाब मिल सकते है, लेकिन इस पोस्ट मे मैंने आपके साथ वही जानकारी शेयर कर रहा हु, जो SEBI की वेबसाइट पर दी गई है,-LINK

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